पूरी दिल्ली देखी होगी लेकिन शर्त लगा लीजिए इन जगहों की सैर नहीं
की होगी आपने
अगर आप घूमने के इरादे से दिल्ली आते हैं या फिर दिल्ली में लंबे समय से रह रहें हो तो घूमने के लिए केवल लाल किला, कुतुबमीनार, इंडिया गेट, पुराने बाजार जैसी केवल मशहूर जगहों पर ही गए होंगे। लेकिन दिल्ली में घूमने के लिए इतना कुछ है जिसके बारे में तो बहुत से लोग जानते ही नहीं। तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप खुद को वहां जाने से रोक नहीं पाएंगे।
इल्तुतमिश का मकबरा
कुतुबमीनार के पास बनी इस कब्र को देखने बहुत कम लोग ही जानते हैं या फिर कह सकते हैं कि इस मकबरे के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। ये मकबरा कुछ साल पहले ही पर्यटकों के लिए खोला गया है। दिल्ली को सबसे पहले राजधानी के रूप में चुनने वाले इस शासक के मकबरे के ऊपर छत नहीं है। हांलाकि यहां छत बनाने का प्रयास किया गया लेकिन हर बार वो छत गिर जाती है। बिना छत वाले इस मकबरे में अंदर की तरफ और गेट पर बेहद सुंदर नक्काशी की गई है। जिसे देखने के लिए एक बार तो आपको जरूर जाना चाहिए।
रजिया-अल-दीन-मकबरा
अगर आपको ऐसी जगहों की सैर करना पसंद हैं जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हों तो ये जगह दिल्ली की उन गुमनाम जगहों में से एक है। दिल्ली की पहली महिला शासक रजिया का मकबरा भी गुमनाम जगह में से एक है। कहते हैं कि रजिया के पति अ्लतुनिया की सेना ने बगावत कर उन्हें मार गिराया था और इसी जगह पर दफनाया गया था। ये मकबरा तुर्कमान गेट के पास बना हुआ है।
गंधक की बावली
दिल्ली में भारत की सबसे पुरानी बावली बनी हुई है। इस बावली में पुराने जमाने में बारिश का पानी इकट्ठा किया जाता था। इस कुएं में सल्फर मिले होने की वजह से इसमें गंध आती है। पांच मंजिला ये कुआं अपने गुणकारी पानी की वजह से भी जाना जाता है।
हिजड़ों का खानकाह
इस जगह के नाम से ही मालूम होता है कि ये जगह हिजड़ों को समर्पित है। इस जगह पर चारों तरफ शांति का माहौल रहता है, लेकिन बहुत कम लोग ही यहां जाते हैं। इस परिसर के बाहर लोहे का दरवाजा है, जिस पर कभी ताला नहीं लगाया जाता। इसके अंदर एक बहुत पुरानी छोटी सी मस्जिद है, जिसे आज भी अच्छे से रखा जाता है। इस जगह की देखभाल किन्नर करते हैं। बताया जाता है कि इस जगह को लोदी वंश के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। ये जगह कुतुब मीनार से कुछ ही दूरी पर है।
सतपुला बांध
सतपुला बांध के आस-पास के नजारे देखने लायक हैं। पुराने समय में पानी को इकट्ठा करने के लिए सात पुलों को बनाया गया था जिस वजह से इसका नाम सतपुला रखा गया था।
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